परीक्षाओ का डर
हमारे समाज मे सभी तबके के लोग रहते है, जिनमे से कुछ सरकारी अफसर होते है तो कुछ निजी वियवसायको के यहाँ नौकरी करते है, और जाहिर सी बात है कि वेतन तथा रॉयलिटी मे भी कही ना कही अंतर होता ही है। परन्तु समझने वाली बात यह है की एक इंसान सरकारी अफसर हो या निजी वियवसाय मे, वो एक समय मे विद्यार्थी जरूर होता है।
इस विद्यार्थी जीवन के काल मे वे सभी अछी-बुरी, सामाजिक, असामाजिक बाते सीखते है परन्तु सबसे
ज्यादा डराने वाली बात जो होती है वह है, परीक्षा।
क्या है "एग्जाम फीवर "?
यह परीक्षा का नाम सुनते ही विद्याथीयों मे एक अजीब सा दबाब होता है। क़ुछ लोग इस दबाब को झेल जाते हैं पर कुछ लोग इस दबाब को डर समझ लेते हैं। यही डर "एग्जाम फीवर " कहलाता है।
क्यों होता है "एग्जाम फीवर "?
परीक्षा हमारे जीवन का एक बहुमूल्य आधार है, जिससे हम मूल्यांकन करके सही तथा गलत मे भेद बता सकते है। पर आज के युग मे यही मूल्यांकन, प्रतियोगिता मे तब्दील हो गया है, जिससे यह डर ९०% (90%) लोगो मे बड़ गया है। मतलब अगर अछे अंक नहीं आये तो कही दाखिला नहीं मिलेगा, ढंग की नौकरी नहीं मिलेगी, नौकरी नहीं मिलेगी तो हम अपने सभी आराम पूरे नहीं कर पाएंगे। यह कुछ ऐसे सत्य है जो हर किसी विद्यार्थी को डराते है और इसका कारण और कोई नहीं बल्कि वही है जो हमारे सुभचिन्तक होते है। वोह खुद से उनकी तुलना करने को कहते है जिससे विद्यार्थी का आत्मविश्वास कम होता है तथा वो दबाब भी महसूस करने लगता है।
विद्यार्थी कैसे "एग्जाम फीवर" से बचे ।
विद्यार्थीयों को परीक्षा के दौरान हमेशा से इसी बात की तलाश होती है कि आखिर कोई उनके इस दबाब को काम कर सके पर हम उनके दबाब को काम करने के बजाये बढ़ देते है क्योंकि हम सोचते है की जो हम कहेंगे वैसा ही होगा परन्तु नहीं ऐसा हर बार संभव नहीं। तो हमे कोशिश करने चाइये की अगर हम किसी को सलाह दे रहे है तो किसी निजी वियक्ति से उसकी तुलना ना करे क्योंकि कई ऐसे विषय भी होते है जिसमे वोह विद्यार्थी उस वियक्ति के अनुपात मे बहुत अच्छा होता है। अगर हम सलाह या तुलना करने का प्रयास करे तो उन सफल लोगो के बारे मे दे जिनकी तारीफ सभी करते हो, ना की सिर्फ आप।
विद्यार्थी को हर बार खोज रहती है एक ऐसी अभिप्रेरणा की जो उनको आगे बढ़ने मे मदद करे ना की उन्हें डराने कि ।
ऐसे ही कुछ बाते है जो विद्यार्थी को ध्यान मे रखनी चाहिए जिससे वो "एग्जाम फीवर " से बच सके । यह बाते निम्नलिखित है -:
1. खुद पर विश्वास रखें- परीक्षाओ मे जो सबसे बड़ी एवं महत्वपूर्ण बात होती है वो है आत्मविश्वास जिसके कारणवश विद्यार्थी ना तोह सही ढंग से पढ़ पाता है और ना कुछ और कर पाता है।
2. अपना मूल्यांकन करे - विधार्थियो को यह नहीं मालुम होता की वोह खुद कितने पानी मे है। मेधावी छात्रों का सफल होने का सबसे बड़ा कारण यही है। अपना आप खुद निरीक्षण करे और यह पता करे कि किन विषयो मे आप कमजोर है तथा किनमें आपकी पकड़ मजबूत है।
3. विश्राम करे - विद्यार्थियों मे परीक्षाओ के दौरान कमजोरी महसूस करना, थका हुआ महसूस करना यह सभी सही तरीके से विश्राम ना करने से होता है। इधर विश्राम का मतलब सोने से नहीं है बल्कि खुद को कुछ समय उन चीज़ों के साथ व्यतीत करने की है जिनसे आप तरो-ताज़ा महसूस कर सके। जैसे- विडियो गेम्स खेलना, टहलना, घूमना, या कुछ और भी।
4. समय नीति को अनुशाशन से निभाना - उपर्युक्त सभी बाते इसी एक सबसे महत्वपूर्ण बात पर निर्भर करती है। आपको इस बात का ध्यान रखना होगा की हम अगर सब कुछ समय से करेंगे तो सब ठीक होगा वरना यह बात तोह हम सब जानते है की अति बुरी होती है। कुछ ऐसे पालन है जैसे:
- समय पर खाना, सोना
- रात मे देर रात तक नहीं जागना
- सुबह जल्दी उठकर पानी पीना उसके बाद टहलना
- अगर 2 घंटे पढाई कर रहे है तो तकरीबन आधे घंटे का ब्रेक लेना
- पुरे दिन मे कुल 24 घंटे होते है तो परीक्षा के समय पूरी 8 घंटे की नींद ले, 6 घंटे मे ब्रेक तथा अन्य काम करे और बाकी बचे 10 घंटे मे पढाई करे।




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